वित्त मंत्री बोले- साढ़े चार माह में 26.50 फीसदी खर्च, राजस्व प्राप्ति 27 फीसदी
रांची। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सोमवार को दूसरी पाली में विपक्षी सदस्यों के बायकॉट के बीच चालू वित्तीय वर्ष के लिए 4296 करोड़ 62 लाख रुपये का प्रथम अनुपूरक बजट पारित कर दिया गया। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर अनुपूरक बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार का वित्तीय प्रबंधन मजबूत है।
चालू वित्तीय वर्ष में बजट व्यय की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि योजना मद में साढ़े चार माह में 23,799 करोड़ खर्च हुआ है जो करीब 26.50 प्रतिशत खर्च हुआ है। इस दौरान सरकार ने 33,707 करोड़ का राजस्व हासिल किया है। यह कुल राजस्व लक्ष्य का 27 प्रतिशत है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि विगत 10-15 वर्षों की समीक्षा करके देख लेना चाहिए कि हमारी सरकार का वित्तीय प्रबंधन कैसा रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि अभी तक सरकार को बाजार से कर्ज लेने की जरुरत नहीं पड़ी है। हमारी सरकार कर्ज लेने की 3 प्रतिशत की सीमा से बहुत नीचे हैं। आज भी सरकार 18 हजार करोड़ रु बाजार से ऋण लेने की हकदार है। यह बताता है कि हमारा वित्तीय प्रबंधन कैसा है।
मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि साढ़े चार माह में केंद्रीय करों में राज्य को सिर्फ 17 प्रतिशत का हिस्सा मिला है। यह असंतोषजनक स्थिति है। केंद्र की उज्ज्वला योजना पर सवाल उठाते हुए मंत्री ने कहा कि यह विफल रही है। वहीं, राज्य सरकार महिलाओं को ‘माई सम्मान योजना’ के तहत 2,500 रुपये प्रतिमाह दे रही है, जिसका उपयोग वे बच्चों की पढ़ाई और जरूरतों में कर रही हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि बजट में पिछले छह वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। 2001 से 2018-19 तक कृषि पर कुल 15,887 करोड़ खर्च हुए थे, जबकि 2019-20 से 2025-26 तक यह बढ़कर 26,464 करोड़ हो गया। सिंचाई पर भी छह वर्षों में 11,069 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
झारखंड में हैं आठ लाख बेरोजगार
किशोर ने सदन में बताया कि राज्य में करीब आठ लाख बेरोजगार पंजीकृत हैं। पिछले पांच वर्षों में डेढ़ लाख लोगों को रोजगार मिला है। अतिवृष्टि से दो लाख एकड़ खेतों में दलहन-तिलहन की फसलें चौपट हो गईं और हजारों कच्चे मकान ढह गए।
अनुपूरक बजट और वित्त मंत्री के जवाब की मुख्य बातें
• कुल आकार – 4296 करोड़ 62 लाख रुपये
• योजना मद का खर्च – साढ़े चार माह में 23,799 करोड़ यानी 26.5%
• राजस्व संग्रह – 33,707 करोड़ रुपये यानी 27% लक्ष्य की प्राप्ति
• केंद्र से हिस्सा – साढ़े चार माह में सिर्फ 17% अनुदान प्राप्त
• कर्ज की स्थिति – राज्य को अभी तक बाजार से कर्ज लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी
• अधिभार – राजकोष पर 345 करोड़ का अतिरिक्त बोझ, जिसकी व्यवस्था संभव