पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने रविवार (08 मार्च, 2026) को जेडीयू में शामिल हो गए. इस मौके पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, संजय झा, बिजेंद्र यादव, विजय चौधरी जैसे बड़े नेता उपस्थित रहे. सदस्यता ग्रहण के दौरान निशांत कुमार ने सबका आभार व्यक्त किया.

निशांत कुमार ने कहा, “यहां पर मौजूद आप सभी लोगों का अभिनंदन करता हूं. आभार व्यक्त करता हूं. मैं जेडीयू कार्यालय आया हूं. यहां जेडीयू की सदस्यता ग्रहण करने आया हूं. मैं एक सक्रिय सदस्य के रूप में पार्टी का ख्याल रखने की कोशिश करूंगा. मेरे पिता ने राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है, ये उनका निजी फैसला है. मैं इसको स्वीकार करता हूं. आदर करता हूं.” निशांत ने कहा, “पार्टी ने और जनता ने जो विश्वास मुझ पर किया है मैं उस पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा. पार्टी कार्यकर्ता के हिसाब से मैं पार्टी संगठन को मजबूत करने की कोशिश करूंगा. पापा ने जो 20 साल में किया उसे जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश करूंगा. मेरे पिता जी ने जो 20 साल में किया वो सबको याद रहेगा. पिता ने जो 20 साल में किया है उससे पूरे देशवासियों को गर्व है.”

इस मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौजूद नहीं थे. नीतीश कुमार के कभी करीबी रहे आरसीपी सिंह ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है, “प्रिय निशांत आपको सक्रिय राजनीति में आने के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद.” मंच पर वे तमाम नेता बैठे हुए थे, जिनके विरूद्ध सोशल मीडिया और सड़क पर जदयू के कार्यकर्ता भाजपा के साथ मिलीभगत कर नीतीश को राज्यसभा में भेजने की साजिश रचने का आरोप लगा रहे थे। विरोध का स्वर नरम पड़ा इसका तुरंत प्रभाव पड़ा की दो दिन पहले जिस जदयू कार्यालय में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ऊर्फ ललन सिंह के विरूद्ध नारे लग रहे थे, आज जयकारा लगा। दरअसल में बिहार में ही नहीं, पूरे देश में क्षेत्रीय दलों की यही परिपाटी है कि संस्थापक या नम्बर एक के नेता की संताने ही विरासत संभालती हैं।

इसी के तहत पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान को लोजपा (रा), पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के पुत्र तेजस्वी यादव को राजद और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी के पुत्र संतोष कुमार सुमन को हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा की कमान मिली। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के संस्थापक उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश भी राजनीति में आ गए हैं। मोर्चा की कमान उन्हें ही मिलेगी। सभी क्षेत्रीय दलों के नेता मांग कर रहे थे कि निशांत सक्रिय राजनीति में आएं।