नई दिल्ली । केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नार्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से प्रधानमंत्री कार्यालय को ‘सेवातीर्थ’ तथा ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानान्तरण को मंजूरी प्रदान कर दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह मंजूरी दी गयी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि नये प्रधानमंत्री कार्यालय का नामकरण ‘सेवातीर्थ’ किया गया है। श्री मोदी ने शुक्रवार को इसे राष्ट्र को समर्पित किया था।

साउथ और नार्थ ब्लॉक का निर्माण अंग्रेजों ने भारत को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रहने के लिए किया था। वर्ष 1947 में भारत को गुलामी से तो मुक्ति मिली, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने इन भवनों से ही अपने कार्यों का निष्पादन किया। प्रधानमंत्री कार्यालय भी साउथ ब्लॉक के इस भवन से कार्य करता रहा है।

शुक्रवार को अंतिम बार केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक साउथ ब्लॉक में हुई। अब मंत्रिमंडल की बैठकें सेवातीर्थ में होंगी।

साउथ ब्लॉक परिसर ने गुलामी से आज़ादी और फिर स्वतंत्र भारत की अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है, गढ़ा है। इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में बने मंत्रिमंडल के महत्वपूर्ण फैसले होते देखे हैं।

बीते दिनों में यहां मंत्रिमंडल की बैठकों में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। साउथ ब्लॉक के इन कमरों ने विभाजन की विभीषिका भी देखी, युद्ध और आपातकाल की चुनौतियों को भी देखा और शांतिकाल की नीतियों पर भी चिंतन और मनन किया। इन्होंने टाइपराइटर से लेकर डिजिटल गवर्नेंस तक, तकनीक की लंबी छलांग को महसूस किया है।

आज का भारत दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत आज एक सुरक्षित और सक्षम राष्ट्र के रूप में उभरकर सामने आया है और देश विकसित भविष्य के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके लिए एक आधुनिक, तकनीकी और पर्यावरण के प्रति अनुकूल कार्यालय की आवश्यकता थी। नया परिसर एक ऐसा कार्यक्षेत्र है, जो यहां काम करने वाले हर कर्मयोगी की उत्पादकता बढ़ाये, सेवाभाव के उसके संकल्प को प्रोत्साहित करे।

इसी भाव के साथ साउथ ब्लॉक के उद्घाटन के करीब 95 वर्षों के बाद, 13 फरवरी 2026 से सरकार इन भवनों को खाली कर रही है और ‘सेवातीर्थ’ तथा ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरित हो रही है। यह प्रतीकात्मक रूप से गुलामी के अतीत से ‘विकसित भारत’ के भविष्य की ओर बढ़ने की ओर देश का एक और कदम है।

मंत्रिमंडल ने यह संकल्प भी संकल्प लिया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ का हिस्सा बनाया जाये। यह हमारी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता से पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। यह संग्रहालय, हमारी सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाएगा और हमारे गौरवशाली अतीत को समृद्ध भविष्य से जोड़ेगा।