नई दिल्ली। राजस्थान और मध्य प्रदेश में कथित तौर पर कफ सिरप पीने के बाद कई बच्चों की मौत के मामलों ने सरकार को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने शनिवार शाम 4 बजे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों तथा ड्रग कंट्रोलर्स की एक आपात बैठक बुलाई। यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए आयोजित की गई, जिसमें दवा निर्माण प्रक्रिया में संभावित खामियों की पहचान और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने पर चर्चा की गई।
बैठक के बाद केंद्र सरकार ने जहरीले कफ सिरप की कुछ यूनिट्स से उत्पादन पर रोक लगा दी है। सचिव ने साफ निर्देश दिया कि सभी दवा कंपनियां संशोधित Schedule M के नियमों का सख्ती से पालन करें, अन्यथा उनके लाइसेंस रद्द किए जाएंगे।
राज्यों को निर्देश दिया गया कि बच्चों में कफ सिरप का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाए, क्योंकि ज़्यादातर मामलों में खांसी अपने आप ठीक हो जाती है और दवा की ज़रूरत नहीं पड़ती।
सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दवा निगरानी प्रणाली को मजबूत करने, अस्पतालों से समय पर रिपोर्ट भेजने, IDSP-IHIP प्लेटफॉर्म पर शिकायतें दर्ज कराने और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए हैं ताकि त्वरित कार्रवाई संभव हो सके।
इस घटना के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने ‘कोल्ड्रिफ कफ सिरप’ की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं, पुलिस ने लापरवाही के आरोप में एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया है और जहरीले सिरप की निर्माता कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
केंद्र सरकार ने देशभर की दवा कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे निर्माण गुणवत्ता पर शून्य सहनशीलता नीति अपनाएं और Schedule M के नियमों का पालन सुनिश्चित करें।

