साहिबगंज : बरहरवा प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में शेरशाहबादी जाति प्रमाण पत्र पुनः निर्गत करने की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन महाधरना बुधवार को दसवें दिन भी जारी रहा। आंदोलन के दसवें दिन धरनास्थल पर राजनीतिक समर्थन भी देखने को मिला। पाकुड़ के पूर्व विधायक एवं एआईएमआईएम नेता Akhil Akhtar तथा भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की राष्ट्रीय मंत्री Misfika Hasan धरनास्थल पहुंचीं और आंदोलन को समर्थन दिया।
धरनास्थल पहुंचने पर आंदोलनकारियों ने दोनों नेताओं का स्वागत किया। इस दौरान नेताओं ने आंदोलनकारियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनकी मांगों को जायज बताया।
पूर्व विधायक अकिल अख्तर ने कहा कि शेरशाहबादी समुदाय वर्षों से अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा है, लेकिन सरकार और प्रशासन इस गंभीर मुद्दे की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके विधायक कार्यकाल के अंतिम दिनों में जाति प्रमाण पत्र निर्गत होना बंद हो गया था और तब से वह इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर प्रशासनिक स्तर तक उठाते रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह केवल एक कागज का मामला नहीं, बल्कि हजारों छात्र-युवाओं के भविष्य, अधिकार और पहचान का सवाल है। अकिल अख्तर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन बरहरवा से निकलकर उधवा, राजमहल, साहेबगंज और पाकुड़ तक पहुंचेगा तथा जरूरत पड़ने पर चक्का जाम भी किया जाएगा।
वहीं भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की राष्ट्रीय मंत्री मिस्फिका हसन ने कहा कि किसी भी समुदाय को उसके संवैधानिक अधिकार से वंचित रखना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शेरशाहबादी समाज के छात्र-युवा शिक्षा और रोजगार में आरक्षण के लाभ से वंचित हो रहे हैं, जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की।
धरना स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र, युवा और बुजुर्ग मौजूद रहे। आंदोलनकारियों ने कहा कि दस दिनों से लगातार शांतिपूर्ण आंदोलन के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे समाज में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सोसाइटी के प्रतिनिधियों ने कहा कि आंदोलन अब केवल बरहरवा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक शेरशाहबादी जाति प्रमाण पत्र पुनः जारी करने को लेकर ठोस आदेश नहीं दिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरना स्थल पर मुखिया मो. इश्तियाक, मो. अजमईल, तोफाइल शेख, मो. नवाज, महबूब आलम, सोलेमान शेख, वसीम अकरम, महमूद आलम, मो. मोसब्बर, सरफराज अहमद, जहीर शेख, इम्तियाज आलम सहित समाज के कई गणमान्य लोग, छात्र-युवा एवं सैकड़ों आंदोलनकारी उपस्थित थे।

