रांची। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में कांग्रेस ने सोमवार को रांची में प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुराना विधानसभा परिसर से जुलूस निकाला और धुर्वा स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) कार्यालय का घेराव किया। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। झारखंड के अन्य जिला मुख्यालयों पर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
कार्यकर्ता हाथों में पार्टी के झंडे और तख्तियां लेकर निर्वाचन आयोग के खिलाफ नारे लगाते हुए सीईओ कार्यालय पहुंचे। यहां जुलूस सभा में तब्दील हो गया। प्रदर्शन के दौरान सीईसी ज्ञानेश कुमार सहित अन्य के पुतले का दहन किया गया। इसके बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। कांग्रेस ने एसआईआर और मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की।
निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की मजबूत बुनियाद : मरावी
कांग्रेस के सह प्रभारी भूपेंद्र मरावी ने कहा कि निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव व्यवस्था लोकतंत्र की मजबूत बुनियाद है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर यदि लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं तो निर्वाचन आयोग को उनका स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है।
मतदाता सूची पर उठ रहे सवालों का जवाब जरूरी : कमलेश
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनावी पारदर्शिता को लेकर विपक्षी दलों और आम लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे सवालों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। प्रदर्शन के दौरान कमलेश ने निर्वाचन आयोग पर पक्षपात के आरोप भी लगाए, जो कांग्रेस का राजनीतिक दावा है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव केवल मतदान कराने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र नागरिक को बिना भेदभाव मताधिकार का इस्तेमाल करने का समान अवसर देने की व्यवस्था है। विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप ने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र का बुनियादी दस्तावेज है और उसमें किसी भी तरह की अनियमितता नागरिक के मताधिकार को प्रभावित कर सकती है।

