रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत नोटिस जारी करने और दावा-आपत्तियों के निष्पादन की प्रक्रिया जारी है। इस बीच मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने रविवार को कहा कि यह चरण मतदाता सूची को शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

के. रवि कुमार ने कहा कि प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे और किसी विदेशी नागरिक या अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो।

उन्होंने बताया कि इन्यूमरेशन तथा दावा-आपत्ति की अवधि के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन कराने अथवा अन्य आवश्यक कार्रवाई के लिए प्राप्त आवेदनों और आंकड़ों की जांच की जा रही है। इन आवेदनों में सामने आई त्रुटियों और विसंगतियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत दूर किया जा रहा है।

के. रवि कुमार ने बताया कि 24 अगस्त से नो-मैपिंग, तार्किक विसंगति और अन्य श्रेणियों से संबंधित मतदाताओं के मामलों की सुनवाई शुरू होगी। इन मामलों में मतदाताओं को निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) स्तर से नोटिस जारी किया जाएगा और बीएलओ के माध्यम से संबंधित मतदाताओं तक नोटिस पहुंचाया जाएगा।

नोटिस मिलने के बाद संबंधित मतदाता को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए पहले चरण में सात दिनों का समय दिया जाएगा। निर्धारित अवधि में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने पर बीएलओ दोबारा मतदाता से संपर्क करेंगे और पुनः नोटिस उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए सात दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि दावा-आपत्ति की अवधि 5 अगस्त से 15 सितंबर 2026 तक निर्धारित की गई है। इस दौरान प्राप्त दावों और आपत्तियों का संबंधित निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी द्वारा 14 अक्टूबर 2026 तक निस्तारण किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य में मतदाताओं के दावे और आपत्तियां प्राप्त करने के साथ-साथ नए पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने और मौजूदा विवरण में आवश्यक सुधार करने की प्रक्रिया चल रही है।

के. रवि कुमार ने बताया कि झारखंड के ऐसे मतदाता, जिनका नाम किसी अन्य राज्य की मतदाता सूची में दर्ज है और वे अपनी इच्छा के अनुसार झारखंड की मतदाता सूची में नाम स्थानांतरित कराना चाहते हैं, उनसे फॉर्म-8 और घोषणा पत्र प्राप्त किया जा रहा है। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद संबंधित मतदान केंद्र की मतदाता सूची में नाम दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक परिवार या एक ही घर के मतदाताओं को यथासंभव एक ही मतदान केंद्र की मतदाता सूची में दर्ज करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि इन्यूमरेशन चरण में मतदाताओं से प्राप्त आवेदनों और आंकड़ों में पाई गई त्रुटियों एवं विसंगतियों को दूर किया जा रहा है। नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया के माध्यम से आवेदनों तथा उपलब्ध आंकड़ों का विधिसम्मत सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद योग्य पाए जाने वाले मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।

उन्होंने पात्र मतदाताओं से अपील की कि वे प्रक्रिया को लेकर किसी प्रकार की घबराहट न करें। जिला निर्वाचन पदाधिकारी, ईआरओ, एईआरओ और मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

के. रवि कुमार ने राज्य के सभी पात्र भारतीय नागरिकों से विशेष गहन पुनरीक्षण में सक्रिय रूप से भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के माध्यम से तैयार की जाने वाली मतदाता सूची को स्थायी अभिलेख के रूप में संधारित किया जाएगा और भविष्य में यह मतदाताओं तथा उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण अभिलेख के रूप में उपयोगी हो सकती है।

उन्होंने मतदाताओं से अपने विवरण की जांच करने और किसी प्रकार की त्रुटि होने पर निर्धारित प्रपत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराने को कहा।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार केवल भारत के नागरिक ही मतदाता सूची में पंजीकृत हो सकते हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बीएलए-2 और आम नागरिकों से अपील की कि यदि किसी विदेशी नागरिक के मतदाता सूची में शामिल होने का प्रयास किए जाने की जानकारी हो अथवा ड्राफ्ट मतदाता सूची में ऐसे व्यक्ति का नाम दिखाई दे, तो फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्ति दर्ज कराई जाए। ऐसी आपत्तियों के आधार पर ईआरओ और एईआरओ स्तर पर संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी और नियमानुसार आदेश पारित किया जाएगा।